Please open this in IE… coz firefox n flock suck in displaying hindi
कुछ दिनों पहले मेरा एक मित्र मुझे बता रहा था कि यहाँ दक्षिण भारत में प्राय: दो भगवानों के भक्तों में एक द्वंद सा चलता रहता है ! हर कोई अपने पूज्यनीय को श्रेष्ठ दिखाने की कोशिश में रहता है | जिन दो भगवानों के भक्तों में ये द्वंद चलता है वो हैं भगवान विष्णु और भगवन शिव | एक बार तो एक तरफ़ के लोगों ने दूसरों को जलने और उनके भगवन को नीचा दिखाने के लिए एक नदी के तट पे अपना मन्दिर बनाया जिससे पानी उनके भगवन के चरणों से होकर दूसरे भगवन के पास जाए और वो लोग उस पानी को अपने देव पे चधाएं | ये बात तो साफ है की इससे वो लोग बहत ही रुष्ट हुए होंगे , परन्तु मेरा ये स्तम्भ लिखने का मुख्य मुद्दा ये नहीं था |
मेरा दोस्त ये बात मुझे बताते समय संशय में था की उसको जो बात बताई गई थी वो भगवान शिव और भगवन विष्णु की थी या फिर उसमें शिव जी और ब्रम्हा जी की बात हो रही थी | इस संशय का हल इस तथ्य से निकला कि आमतौर ब्रम्हा जी के मदिर नहीं पाए जाते हैं और इन्ही दो भगवानों के ही मन्दिर होते हैं |
ये बात जब उठी तब से ही मैं इस बात को लेकर सोच में हूँ कि ब्रम्हा जी के साथ ही ऐसा अन्याय क्यों हुआ है!!
दुनिया के रचयिता के सम्मान में कुछ नहीं बनाया गया | मैंने कुछ लोगों से सुना हुआ है कि दुनिया में केवल एक ही मन्दिर है जो ब्रम्हा जी को समर्पित है ( मैं इस तथ्य के बरे में पूरी तरह आश्वस्त नहीं हूँ परन्तु मैंने अपनी २० वर्षों की ज़िंदगी में कभी कोई ब्रम्हा जी का मन्दिर नहीं देखा ) |
बहुत सोचने के बाद भी मुझे इस बात का कारण नहीं समझ में आया कि क्यों ब्रम्हा जी के साथ ऐसा अन्याय हुआ है | क्या हिंदू धर्म में ऐसा कोई नियम है कि ब्रम्हा जी कि मूर्ती कि पूजा नहीं हो सकती और बाकि सब भगवानों कि मूर्तियाँ बन सकती हैं |
लोग अपने अपने इष्ट देवों तक के लिए मन्दिर बना लेते हैं और यहाँ तक कि अमिताभ बच्चन का भी एक मन्दिर है (मेरी जानकारी के अनुरूप ) तो फिर क्यों ब्रम्हा जी के लिए मन्दिर नहीं हैं |
आज का गाना – जाने वो कैसे लोग थे – हेमंत कुमार द्वारा गाया हुआ प्यासा फ़िल्म से
अगर कोई इस स्तम्भ को पढने कि जेहमत उठा सके तो कृपया इस सवाल पे चिंतन करें और मेरी मदद करें इस पहेली को सुलझाने में |
हिन्दी में लिखना अंग्रेज़ी में लिखने से कई गुना दुश्वार लगता है जबकि हिन्दी हमारी मात्रभाषा है !!








Feb 03, 2008 @ 16:15:54
how the hell you manage to write hindi in such a pure form… i mean its like reading some book … do u really know all the words you have written like दुश्वार द्वंद .. anyway nice try and good point raised !! hope u’ll find the answer
Feb 03, 2008 @ 16:57:46
priye mitr,
brahma ji ko abhishaap mila tha ki unki pooja nahi hogi, shayad shivji ne hi diya tha…though i guess brahmaji wud surely appreciate ur concern. ye bhakti bhav kaise???
Jun 06, 2011 @ 14:10:33
https://www.facebook.com/shreebrahmaji
just visit dis link thanx
Feb 03, 2008 @ 19:17:34
अरे फायरफॉक्स यह दुश्मनी क्यों। मैं हमेशा फायरफॉक्स पर काम करता हूं। हिन्दी में तीन चिट्ठे लिखता हूं कोई मुश्किल नहीं होती।
मैं लिनेक्स पर काम करता हूं। यदि आप भी करते हैं तो SCIM के साथ phonetic कीबोर्ड प्रयोग कीजिये। यदि आप अंग्रेजी में टाइप कर लेते हैं तो यह बहुत आसान है।
विंडोज़ पर कैफे हिन्दी का प्रयोग कीजिये यहां से डाउनलोड कीजिये। इसमें कई कीबोर्ड हैं phonetic आसान है इसे प्रयोग करें।
कम से कम हज़ार व्यक्ति तो हिन्दी में चिट्ठा लिख रहें हैं। आप भी लिखें।
Feb 04, 2008 @ 01:28:25
कुलबीर सैनी : बहुत खुशी ये जान के कि तुम्हे मेरा स्तम्भ पढ़ के ऐसा लगा कि कोई पुस्तक पढ़ रहे हो!! धन्यवाद
सुशांत : मुझे ऐसी किसी बात कि जानकारी नहीं थी | अच्छा हुआ जो तुमने मुझे बता दिया… शिव जी ने बेचारे ब्रम्हा जी को पूजे जाने से वंचित कर दिया…
उन्मुक्त : मैं हिन्दी लिखने के लिए तो गूगल transliteration का प्रयोग करता हूँ परन्तु मेरे और मेरे कई मित्रों के फायर फॉक्स में हिन्दी अच्छी तरह नहीं आती है | लगता है कुछ फोंट्स कि गड़बड़ होगी |
Feb 04, 2008 @ 10:19:46
Mere mann mein bhi ye khayal bahut baar ubhraa hai (aaya hai) ki Brahma ji ki pooja kyun nahi hoti, jab ki pauranik kathao mein Brahmaji ki bahut pooja hoti thi !
Jun 06, 2011 @ 14:09:10
https://www.facebook.com/shreebrahmaji
Feb 04, 2008 @ 16:03:05
धरती के निर्माण से पहले, जब ब्रह्म जी का जनम हुआ था तब उनके एक ही सर था .फिर उन्होने जब सरस्वती देवी का निर्माण किया, तो उनका रूप देख कर ब्रह्मा जी मंत्र मुग्ध हो गए और उनकी कुदृष्टि देख कर सरस्वती जी उनसे छिपने के लिये चारों दिशाओं मैं भागी . जिस जिस दिशा मैं वो भागी वाहन वाहन ब्रह्म जी ने अपना सर उगा लिया. तब वो स्वर्ग कि तरफ भागी तो ब्रह्म जी ने अपने उपर कि तरफ भी एक सर उगा लिया. ब्रह्म जी कि अपनी पुत्री के प्रति ऐसी लालसा देख कर शिव जी को ब्रह्मा पैर क्रोध आया और अपने त्रिशूल से उन्होने उनका पांचवा सर काट दिया और उनको श्राप दिया कि धरती पैर उनकी कभी पूजा नहीं होगी.
उम्मीद करता हूँ तुम्हरी शंका का निवारण हो गया होगा
Feb 04, 2008 @ 17:45:21
there is just one temple of brahma. it is in pushkar near ajmer in rajasthan. the story i have heard is the abhishaap brahma ji got. but there is also a theory that the creator of the world did not want people to pray him….
if u happen to visit ajmer, do visit pushkar ji (only 20 km from there).
Apr 16, 2008 @ 21:49:34
There is one more Temple of Brahma JI in India. Yes… This is Near Nagpur [Maharashtra] 40 KMS from Nagpur before Kondhali, village name is Ringnabodi. Let me know if you need any other information on this temple
Sorry I am not fimilar in Hindi Typing and Hence this is in English….
Dec 15, 2010 @ 10:57:37
bramha ji ke dadhi our munch hani parantu dadhi aor munch to hanuman je ke bhi hani , hanuman je mattra ek shiv ji ke abtar hani mattra yahei karan hai
Mar 26, 2012 @ 15:45:22
धरती के निर्माण से पहले, जब ब्रह्म जी का जनम हुआ था तब उनके एक ही सर था .फिर उन्होने जब सरस्वती देवी का निर्माण किया, तो उनका रूप देख कर ब्रह्मा जी मंत्र मुग्ध हो गए और उनकी कुदृष्टि देख कर सरस्वती जी उनसे छिपने के लिये चारों दिशाओं मैं भागी . जिस जिस दिशा मैं वो भागी वाहन वाहन ब्रह्म जी ने अपना सर उगा लिया. तब वो स्वर्ग कि तरफ भागी तो ब्रह्म जी ने अपने उपर कि तरफ भी एक सर उगा लिया. ब्रह्म जी कि अपनी पुत्री के प्रति ऐसी लालसा देख कर शिव जी को ब्रह्मा पैर क्रोध आया और अपने त्रिशूल से उन्होने उनका पांचवा सर काट दिया और उनको श्राप दिया कि धरती पैर उनकी कभी पूजा नहीं होगी.
उम्मीद करता हूँ तुम्हरी शंका का निवारण हो गया होगा
Jun 11, 2012 @ 13:49:27
There is one more temple of brahma ji in ashotra near by balotra ,barmer district in rajsthan and this holly and wonderfull temple was created by ‘kheteswar data’ .jay kheteswar data ..jay brahma ji ..