कहानी मिर्ची की

दुनिया में दर्दनाक अनुभवों की कमी तो नहीं है पर जब कोई अनजाने आपको एक तीखी मिर्ची खिला दे, जिस असीम आनंद की प्राप्ति उस समय होती है, उसका वर्णन संस्कारी शब्दों में करना थोड़ा मुश्किल हो जाता है। मिर्ची नाम से ही अपनी सी लगती है, ऐसा लगता है, और मसाले जिनके लिए भारत का दक्षिणी भाग प्रसिद्ध है, मिर्ची भी उन्ही की विरासत होगी और फिर बाकी मसलों की तरह यूरोपियों ने मिर्ची का स्वाद भी हमारे घाटों पे चखा होगा । पर बड़े आश्चर्य की बात है, कि भारत में मिर्ची का इतिहास कुछ 500 साल ही पुराना है। 15 वीं सदी के अंत में, वास्को डि गामा और उनके साथियों ने ही पहली बार हमारी जीभ जलाई थी। मिर्ची के बारे में ऐसी ही कुछ अनोखी बातें मुझे एपिक टीवी चैनल के एक शो से पता चलीं जो मैं अपनी (बहुत ही कमज़ोर) याददाश्त और विकिपीडिआ एवं अन्य स्रोतों (मुख्यत:) की सहायता से, एकत्रिक करके अपने जैसे कुछ और जिज्ञासु मित्रों के साथ बाँट रहा हूँ।

7500 BC यानी कि आज से 9500 साल पहले से हमारे दक्षिण अमरीकी मित्र मिर्ची का लुत्फ़ उठा रहे हैं। 4500 BC में दक्षिण अमेरिका में इसकी खेती शुरू हुई, लगबघ उसी समय जब हमने चावल उगाना शुरू किया। सन 1492 में कोलम्बस जब भारत की खोज में निकला था, तब उसका एक लक्ष्य काली मिर्च (जिसको ब्लैक गोल्ड कहा जाता था) तक पहुँचने का दूसरा रास्ता ढूंढना था। वो जब अमेरिकी महाद्वीप में पहुंचा तो उसकी मुलाकात मिर्ची से हुई। वहां की स्थानीय भाषा में इसे चिली कहा जाता था, तो रेड इंडियंस की तरह ही पैप्पर की तलाश में मिली चिली का नाम चिली पैप्पर रख दिया। उसके बाद मिर्ची ने दुनिया के कोने कोने तक सफर किया और अब दुनिया की अमूमन हर पाक शैली में इसकी मौजूदगी है। मिर्ची को हमारे भारत की आबो-हवा और हम भारतीयों की मेहमान नवाज़ी इतनी रास आयी कि , आज के समय में भारत मिर्ची का सबसे बड़ा उत्पादक एवं निर्यातक है।

अब मिर्ची का ज़िक्र होते में ज़ेहन में पहला सवाल यही आता है कि दुनिया में सबसे तीखी मिर्ची कौनसी होती और, वो कितनी तीखी होगी? मिर्ची की तीव्रता मापने के लिए स्कोविल्ल स्केल का इस्तेमाल किया जाता है। इस स्केल में चीनी की उस मात्रा को नापा जाता है जिसको मिलाने से इस मिर्ची का तीखापन ख़त्म हो जाये। इस स्केल में सबसे तीखी मिर्ची, अमेरिका की “कैरोलिना रीपर” मानी जाती है जिसका तीखापन 22,00,000 SHU नापा गया है। भारत की सबसे तीखी मिर्ची “भूत ज़लकीया” की तीव्रता 15,80,000 SHU नापी गयी है।

इस पोस्ट का अंत मैं कुछ दिलचस्प मिर्चियों के साथ करता हूँ..

कश्मीरी मिर्च – नाम से ही साफ़ है की ये कश्मीर में होती है , पर इसकी सबसे मज़ेदार बात ये है की ये मिर्ची बस नाम की है , इसकी तीव्रता बस लगबगाह 4000 -5000 तक होती है, इसलिए कश्मीरी खान पान में इसका प्रयोग तीखेपन की जगह ज़ायके के लिए होता है।

गुंटूर मिर्च – आंध्रा के तीखे खाना का राज़ ये गुँटूरी मिर्च है। यह भारत से निर्यात होने वाली मिर्ची में 30% हिस्सा गुंटूर मिर्च का है। इसकी तीव्रता 50,000 -1,00,000 SHU तक होती है।

मुंडू मिर्च – आंध्रा और तमिल क्षेत्रों में उगाई जाने वाली ये मिर्ची अपने आकार की वजह से अत्यंत दिलचस्प है। अन्य मिर्चियों की तरह लम्बी और पतली होने की जगह यह मिर्ची गोलाकार होती है। इस मिर्ची का प्रयोग भी तीव्रता की जगह ज़ायके के लिए होता है। मैंने ऐसी गोल मिर्च नहीं देखी पर मेरे आंध्र-तमिल दोस्त ज़रूर खुशनसीब हैं।

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